भारत में परिवहन प्रणाली किसी क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह न केवल नागरिकों एवं वस्तुओं के आवागमन को सुगम बनाती है, बल्कि अर्थव्यवस्था में पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं (Economies of Scale) भी प्रदान करती है।
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम द्वारा क्रियान्वित दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर, NCR में शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगा।
इसके साथ ही, यह परियोजना आर्थिक अवसरों का सृजन करते हुए NCR के निवासियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार (Amelioration) लाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
जापान फंड फॉर प्रॉस्पेरस एंड रेजिलिएंट एशिया एंड द पैसिफिक (JFPR)
जापान ने वर्ष 2000 में एशियाई विकास बैंक की गरीबी उन्मूलन एवं सामाजिक विकास से संबंधित परियोजनाओं को सुदृढ़ करने हेतु जापान फंड फॉर पॉवर्टी रिडक्शन की स्थापना की थी।
वैश्विक परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए, एडीबी ने सितंबर 2021 में JFPR का पुनः नामकरण कर इसे “जापान फंड फॉर प्रॉस्पेरस एंड रेजिलिएंट एशिया एंड द पैसिफिक” किया, ताकि एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र की विविध चुनौतियों का व्यापक रूप से समाधान किया जा सके।
“जापान फंड फॉर प्रॉस्पेरस एंड रेजिलिएंट एशिया एंड द पैसिफिक” का विस्तारित उद्देश्य एडीबी के विकासशील सदस्य देशों को कोविड-19 महामारी से उबरने में सहायता प्रदान करना तथा भविष्य की संभावित आपदाओं के लिए उनकी तैयारी एवं लचीलापन को सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही, यह सतत समाज के निर्माण एवं समृद्ध भविष्य की नींव रखने पर भी बल देता है, जबकि कमजोर वर्गों का समर्थन को निरंतर करता है।
पिछले दो दशकों में मूल JFPR द्वारा प्राप्त उपलब्धियों एवं अनुभवों के आधार पर, इस विस्तारित दृष्टिकोण का उद्देश्य शेष आबादी को गरीबी रेखा से ऊपर उठाना तथा सतत विकास के मार्ग पर समानता, समृद्धि एवं लचीलापन सुनिश्चित करना है।
भारत सरकार एवं एशियाई विकास बैंक के बीच दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के लिए दिनांक 8 सितंबर 2020 को एक अनुदान समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत, एशियाई विकास बैंक ने मूल JFPR के तहत उपलब्ध अनुदान राशि को एनसीआरटीसी को प्रदान करने पर सहमति दी।
USD 3 मिलियन का यह JFPR अनुदान सतत विकास लक्ष्य (SDG) 11.2 का समर्थन करता है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित, किफायती, सुलभ एवं सतत परिवहन प्रणाली उपलब्ध कराना तथा सड़क सुरक्षा में सुधार करना है, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनों जैसे संवेदनशील वर्गों पर विशेष ध्यान देते हुए।
यह अनुदान भारत के लिए ADB की कंट्री पार्टनरशिप स्ट्रेटेजी (2018–2022) के अनुरूप है, जिसमें लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, यह ADB की कंट्री ऑपरेशंस बिजनेस प्लान (2020–2022) का भी हिस्सा है।
एनसीआरटीसी द्वारा कार्यान्वित JFPR अनुदान के उद्देश्य
दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के प्रारंभ से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होने की अपेक्षा है, जिससे NCR के लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
JFPR अनुदान का उद्देश्य सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान करना तथा रोजगारपरक कौशल (Employability Skills) के अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों—विशेष रूप से महिलाओं, वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों—को व्यापक सामाजिक एवं आर्थिक अवसर प्राप्त हो सकें।
JFPR कार्यक्रम के प्रमुख आउटपुट
दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के लिए JFPR कार्यक्रम मुख्यतः निम्नलिखित तीन आउटपुट पर आधारित है:
आउटपुट–1:
वृद्धजन, महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना।
आउटपुट–2:
नमो भारत कॉरिडोर के साथ स्थित चयनित संस्थानों में छात्राओं के लिए सुरक्षित यात्रा, आत्मरक्षा एवं रोजगारपरक कौशल के संबंध में जागरूकता बढ़ाना।
आउटपुट–3:
नमो भारत स्टेशनों के आसपास लैंगिक एवं सामाजिक रूप से समावेशी सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण।
महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करना
इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक सार्वजनिक परिवहन से जुड़े पेशेवरों के लिए लैंगिक संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करना तथा महिलाओं को मोबिलिटी सेवा प्रदाता (जैसे ई-रिक्शा एवं टैक्सी चालक) के रूप में प्रशिक्षित करना है।
इससे न केवल महिलाओं के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि अंतिम गंतव्य तक पहुंच महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से सुरक्षित परिवहन की धारणा एवं अनुभव में भी सुधार होगा।
दिव्यांगजनों की गतिशीलता में सुधार
दिव्यांगजन अक्सर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं, जैसे दिव्यांग-अनुकूल अवसंरचना की कमी तथा सहायक उपकरणों तक सीमित पहुंच, जो प्रायः उनकी आर्थिक स्थिति के कारण प्रभावित होती है।
JFPR अनुदान के अंतर्गत दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे उनकी गतिशीलता में सुधार होगा तथा उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग
पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तथा भारत सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप, JFPR कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण हेतु ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक कार एवं इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग किया जा रहा है।
यह पहल आउटपुट–1 (सुरक्षित आवागमन) के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रक्रिया को सुदृढ़ करती है। महिलाओं को ई-रिक्शा एवं इलेक्ट्रिक कार चलाने का प्रशिक्षण प्रदान कर न केवल उनके कौशल का विकास किया जाएगा, बल्कि उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।
JFPR एवं इसकी कार्यान्वयन एजेंसी एनसीआरटीसी इस पहल के माध्यम से एक आदर्श स्थापित करेंगे, जिससे लाभार्थी न केवल ड्राइविंग कौशल में प्रशिक्षित होंगे, बल्कि पर्यावरण अनुकूल परिवहन के महत्व को भी समझ सकेंगे।
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लैंगिक एवं सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक शौचालय
JFPR अनुदान के अंतर्गत सामाजिक रूप से समावेशी एवं जेंडर-न्यूट्रल सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण एक महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र है। सार्वजनिक शौचालयों की कमी महिलाओं, बालिकाओं एवं दिव्यांगजनों की आवाजाही को सीमित करती है, अतः सभी के लिए स्वच्छता, स्वास्थ्य, पहुंच, सुरक्षा एवं गोपनीयता सुनिश्चित करने हेतु इनका विकास अत्यंत आवश्यक है।
इन शौचालयों को पर्यावरण की दृष्टि से सतत बनाने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जैसे अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण (Wastewater Recycling) एवं सौर ऊर्जा पैनलों का उपयोग।
इस परियोजना के 30 अगस्त 2025 तक पूर्ण होने की अपेक्षा है।
पृष्ठभूमि
JFPR अनुदान का एक महत्वपूर्ण घटक महिलाओं, बालिकाओं, वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों की सुरक्षित यात्रा के प्रति जागरूकता फैलाना है। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय पर्याप्त सुरक्षा उपायों में कमी विशेष रूप से महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।
सार्वजनिक परिवहन में कुछ यात्रियों के अनुचित व्यवहार को प्रायः उत्पीड़न के रूप में अनुभव किया जाता है, जिससे न केवल महिलाओं की वास्तविक आवाजाही प्रभावित होती है, बल्कि भय की भावना भी उनके लिए एक बाधा बनती है।
लैंगिक गतिशीलता के प्रति प्रतिबद्धता
JFPR अनुदान लैंगिक-उत्तरदायी गतिशीलता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रदाता यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, इसलिए बस चालकों एवं परिचालकों सहित अन्य परिवहन कर्मियों को लैंगिक संवेदनशीलता का प्रशिक्षण प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
एनसीआरटीसी द्वारा आयोजित GESI कार्यक्रम
नमो भारत कॉरिडोर के अंतर्गत अंतिम मील कनेक्टिविटी के दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने हेतु एनसीआरटीसी द्वारा GESI संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन कार्यक्रमों में जेंडर एवं मोबिलिटी विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें निम्न विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया:
एनसीआरटीसी भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने का प्रयास करेगा, ताकि अंतिम मील कनेक्टिविटी प्रदान करने वाले सेवा प्रदाताओं में लैंगिक समानता एवं समावेशन की भावना विकसित हो सके।
ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम
दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर में जेंडर-उत्तरदायी गतिशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एनसीआरटीसी द्वारा JFPR अनुदान के अंतर्गत ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ एक सामुदायिक जागरूकता एवं सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम 28 फरवरी 2023 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य:
इस प्रकार के कार्यक्रमों से प्राप्त अनुभव एवं सुझाव भविष्य में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अधिक सुरक्षित एवं सहज यात्रा वातावरण बनाने में सहायक होंगे।
कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम की शुरुआत पहले नमो भारत कॉरिडोर एवं इसके संभावित लाभों—जैसे सुरक्षित, संरक्षित, तीव्र एवं विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन—पर विस्तृत जानकारी प्रदान करने वाले सत्र से की गई।
इसके पश्चात जेंडर एवं मोबिलिटी विशेषज्ञों द्वारा विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनमें बेहतर गतिशीलता के माध्यम से आय सृजन के अवसरों में वृद्धि तथा बड़े शहरों/कस्बों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
कॉलेज की छात्राओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण
महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षित एवं सशक्त यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, JFPR द्वारा उत्तर प्रदेश के मेरठ एवं गाजियाबाद जिलों के विभिन्न कॉलेजों में अध्ययनरत छात्राओं के लिए नियमित रूप से आत्मरक्षा प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत जब ये छात्राएं अपने व्यावसायिक जीवन में प्रवेश करेंगी, तब उन्हें विभिन्न स्थानों पर यात्रा हेतु सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना होगा। ऐसे में उनकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
ये आत्मरक्षा प्रशिक्षण सत्र केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के प्रशिक्षकों द्वारा संचालित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास एवं सुरक्षा की भावना विकसित करना है, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति अथवा असामाजिक तत्वों का सामना करने में सक्षम बन सकें।
इन प्रशिक्षण सत्रों के साथ-साथ नमो भारत कॉरिडोर एवं इसके सुरक्षित एवं सुगम यात्रा अनुभव से संबंधित लाभों की जानकारी भी प्रदान की जाती है। इस प्रकार के प्रयास महिलाओं एवं बालिकाओं को नमो भारत को एक सुरक्षित परिवहन विकल्प के रूप में अपनाने हेतु प्रोत्साहित करते हैं।
JFPR का लक्ष्य गाजियाबाद एवं मेरठ जिलों के विभिन्न कॉलेजों में 900 से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करना है।
प्रशिक्षित छात्राओं को प्रमाण-पत्र वितरण
आत्मरक्षा प्रशिक्षण के अंतर्गत अब तक डीएन डिग्री कॉलेज एवं डीएन पॉलिटेक्निक कॉलेज, मेरठ में कुल 184 छात्राओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
इन छात्राओं को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा व्यवस्थित एवं प्रभावी प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत, डीएन डिग्री कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीआरटीसी एवं केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के अधिकारियों की उपस्थिति में इन 184 छात्राओं को सहभागिता प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
प्रशिक्षित छात्राओं द्वारा साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभवों से उनके आत्मविश्वास एवं मनोबल में उल्लेखनीय वृद्धि परिलक्षित हुई।
ये प्रमाण-पत्र न केवल उनकी उपलब्धि का प्रमाण हैं, बल्कि अन्य छात्राओं को भी आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे वे आत्मविश्वास एवं साहस के साथ किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर सकें।